कैलाश विजयवर्गीय के निवास पर सुरक्षा अलर्ट, विरोध कर रहे दंपति को पुलिस ने हिरासत में लिया
इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर स्थित नंदा नगर क्षेत्र में प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के शासकीय व निजी आवास पर विरोध प्रदर्शन दर्ज कराने पहुंचे प्रहलाद पांडे और उनकी पत्नी संगीता पांडे को स्थानीय पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। यह दंपती हाल ही में राजधानी दिल्ली में प्रतियोगी परीक्षाओं के छात्रों और आंदोलनकारियों पर हुए लाठीचार्ज तथा मंत्री द्वारा कथित तौर पर दिए गए एक बयान का विरोध करने के लिए वहां पहुंचा था, जिसमें आंदोलनकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है।
मंत्री आवास के बाहर मीडिया से चर्चा के दौरान हुई बहस, मौके पर मंगाया गया अतिरिक्त बल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रहलाद पांडे जब मंत्री निवास के मुख्य गेट के बाहर मीडियाकर्मियों से बातचीत कर रहे थे, तभी वहां मौजूद पुलिस बल ने उन्हें वहां खड़े होने से मना किया और तुरंत उस स्थान को खाली करने के निर्देश दिए। इस बात को लेकर पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारी दंपती के बीच तीखी बहस छिड़ गई। हालात को बिगड़ता देख पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों पति-पत्नी को अपनी हिरासत में ले लिया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान करीब 15 मिनट तक मौके पर भारी हंगामे और गहमागहमी का माहौल बना रहा, जिसके बाद पुलिस ने स्थिति पर काबू पा लिया।
"मंत्री के अपमानजनक बयान के विरोध में लोकतांत्रिक तरीके से दर्ज कराने आए थे आपत्ति"
पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने से ठीक पहले प्रहलाद पांडे और उनकी पत्नी संगीता पांडे ने मीडिया के सामने आरोप लगाया कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने देश के आंदोलनरत युवाओं और छात्रों के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग करते हुए उन्हें कथित तौर पर "कीड़े-मकोड़े" कहा था। उनका कहना था कि वे इसी आपत्तिजनक बयान के विरोध में पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आपत्ति दर्ज कराने के लिए यहां आए थे। उनका तर्क था कि शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन करना भारत के हर नागरिक का मौलिक और संवैधानिक अधिकार है और उनका प्रदर्शन किसी भी तरह से गैर-कानूनी नहीं था।
पुलिस का पक्ष: मंत्री भोपाल में थे, यातायात व्यवस्था और सुरक्षा के मद्देनजर की गई कार्रवाई
दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर सफाई देते हुए स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिस वक्त यह प्रदर्शन हुआ, उस दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय इंदौर में मौजूद ही नहीं थे, बल्कि वे आधिकारिक कार्यों के चलते भोपाल में थे। पुलिस प्रशासन के अनुसार, मंत्री के निवास और वहां मौजूद उनके परिवार की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए आवश्यक एहतियाती कदम उठाए गए। पुलिस का यह भी तर्क था कि दंपति के इस विरोध प्रदर्शन के कारण मुख्य मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने लगी थी और वहां जाम की स्थिति उत्पन्न हो रही थी, जिसके चलते कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दोनों को एहतियातन हिरासत में लेना पड़ा।
इस सनसनीखेज घटना के दौरान मंत्री निवास के बाहर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करते हुए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था और हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी गई थी। जहां एक तरफ पुलिस का कहना है कि शहर में शांति और कानून-व्यवस्था कायम रखना उनकी सबसे पहली प्राथमिकता है, वहीं दूसरी ओर हिरासत में लिए गए दंपती का साफ तौर पर कहना है कि उनका विरोध पूरी तरह अहिंसक और लोकतांत्रिक था। इस घटना के सामने आने के बाद से स्थानीय राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।

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