भगवान विष्णु ने धारण किए हैं कई रुप
भगवान विष्णु श्री हरि ने देवताओं और भक्तों के कल्याण के लिए वामन, मत्यस्य, कच्छप और नरसिंह सहित अन्य कई रूप धारण किए हैं। ग्रंथों में ऐसे ही एक और स्वरूप की कथा मिलती है, जिसका उद्देश्य हयग्रीव नामक दैत्य से देवताओं को मुक्ति दिलाना था।
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान विष्णु वैकुंठ धाम में एक धनुष की डोरी के सहारे काफी गहरी नींद में सो गए थे। उसी समय स्वर्ग लोक में हयग्रीव नामक दैत्य ने अपनी सेना सहित खूब आंतक मचा रखा था। तब देवता अपनी समस्याएं लेकर ब्रह्मा जी के पास पहुंचे।
ब्रह्मा जी ने सभी देवताओं को श्री हरि विष्णु के पास जाने को कहा। इसपर सभी वैकुंठ लोक पहुंचे, वहां देखा कि नारायण तो गहरी निद्रा में लीन हैं। सभी परेशान होकर फिर से ब्रह्मा जी के पास पहुंचे। उनसे बताया कि श्री हरि तो निद्रा में लीन हैं। कथा के अनुसार तब ब्रह्मा जी ने विष्णु को जगाने के लिए वम्री नामक कीड़े को भेजा। उस कीड़े ने जाकर धनुष की डोर को काट दिया जिसके सहारे नारायण सो रहे थे। कीड़े के डोर को काटते ही उसी डोर से भगवान विष्णु का शीश कट गया।
भगवान विष्णु का शीश कटते ही समस्त ब्रह्मांड में अंधेरा छा गया। देवता परेशान हो गए कि यह क्या हो गया? अब क्या होगा? तभी ब्रह्मा जी ने सभी देवताओं को देवी भगवती की स्तुति करने के लिए कहा। आराधना से मां भगवती प्रसन्न हुईं और देवताओं को दर्शन देकर बताया कि यह सब कुछ दैत्य हयग्रीव के वध निमित्त हुआ है। उन्होंने बताया कि अश्वमुखी हयग्रीव ने तपस्या करके यह वरदान प्राप्त किया है कि उसे कोई अश्वमुखी मनुष्य ही मार सकता है। इसीलिए श्री हरि विष्णु का यह रूप लेना ही था। इसके बाद नारायण को घोड़े का सिर लगाया गाया और उन्होंने दैत्य हयग्रीव का संहार किया। इसके बाद देवताओं को स्वर्ग लोक प्राप्त हो गया।

Fuel Price Update: आपके शहर में क्या है पेट्रोल-डीजल का ताजा भाव? 17 फरवरी को जारी हुए नए रेट, यहां चेक करें
बड़ी खुशखबरी! फिर कम हुई सोने-चांदी की कीमतें, बजट बनाने से पहले चेक करें 22K और 24K का भाव