आधुनिक दौर में स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल के लिए हर घर की रसोई में आरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस) वॉटर प्यूरीफायर का प्रचलन तेजी से बढ़ा है। पानी को 100 प्रतिशत शुद्ध और बीमारियों से मुक्त मानकर लोग सीधे नल के पानी के बजाय आरओ वाटर पर निर्भर हो रहे हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक शोधन प्रक्रिया के दौरान पानी से हानिकारक तत्वों के साथ-साथ शरीर के लिए आवश्यक प्राकृतिक खनिज भी नष्ट हो जाते हैं, जो लंबी अवधि में स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

टीडीएस स्तर के आधार पर आरओ का उचित चयन जरूरी

जल शोधन विशेषज्ञ बताते हैं कि पानी में मौजूद हैवी मेटल, आर्सेनिक और फ्लोराइड जैसे तत्वों को हटाने के लिए आरओ तकनीक बेहद प्रभावी है। यदि आपके क्षेत्र के सप्लाई वाटर का टीडीएस (टोटल डिस्टॉल्व्ड सॉलिड्स) 500 से अधिक है, तो आरओ का उपयोग आवश्यक हो जाता है। इसके विपरीत, यदि टीडीएस का स्तर 150 से 250 के बीच है, तो आरओ पानी को अत्यधिक डिमिनरलाइज कर देता है, जिससे कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे उपयोगी खनिज बाहर निकल जाते हैं।

अस्थि घनत्व और हृदय स्वास्थ्य पर पड़ता है असर

पानी से कैल्शियम और मैग्नीशियम के खत्म होने का सीधा प्रभाव हड्डियों की मजबूती और हृदय की कार्यप्रणाली पर पड़ता है। डिमिनरलाइज्ड जल का निरंतर सेवन करने से शरीर में आवश्यक मिनरल्स का संतुलन बिगड़ने लगता है, जिससे जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।

पाचन तंत्र और प्रतिरोधक क्षमता में गिरावट की संभावना

शरीर के एसिड-बेस संतुलन और पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में प्राकृतिक खनिजों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मिनरल-रहित पानी का सेवन करने से पाचन क्रिया प्रभावित हो सकती है, जिससे गैस, एसिडिटी और निरंतर थकान महसूस होने की शिकायत सामने आती है। इसका प्रभाव विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर अधिक तेजी से देखने को मिलता है।

गर्भवती महिलाओं एवं बाल विकास पर प्रतिकूल प्रभाव

गर्भस्थ शिशु के विकास और बच्चों की शारीरिक वृद्धि के लिए कैल्शियम और आवश्यक लवण अत्यंत आवश्यक होते हैं। ऐसे में अनुचित टीडीएस स्तर वाले डिमिनरलाइज्ड जल का सेवन पोषण की कमी का कारण बन सकता है।

सुरक्षित पेयजल के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि घर के प्यूरीफायर का टीडीएस हमेशा 150 से 250 के मध्य सेट रखें और इसे कभी भी 80 से नीचे न जाने दें। यदि आपके क्षेत्र में आपूर्ति किए जाने वाले जल का टीडीएस 300 से कम है, तो आरओ के बजाय यूवी (UV) या यूएफ (UF) प्यूरीफायर का चयन करना अधिक उपयुक्त होता है। इसके साथ ही, दिन में पारंपरिक तरीके जैसे मटके या तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से शरीर को प्राकृतिक रूप से मिनरल्स प्राप्त होते रहते हैं।