पहली बार मिक्स्ड रिकर्व के पोडियम पर भारत, धीरज-कुमकुम की जोड़ी ने जीता रजत
भारत की दिग्गज मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने अपने जन्मदिन को बेहद खास और यादगार बना दिया है। दो अक्टूबर 1997 को जन्मीं लवलीना ने अपने 29वें जन्मदिन के अवसर पर एशियन गेम्स में महिलाओं के 75 किग्रा भार वर्ग का स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। खिताबी मुकाबले में उन्होंने चीन की बाओ जियी को सर्वसम्मति से 5-0 के अंतर से करारी शिकस्त दी। इस शानदार जीत के साथ लवलीना ने न केवल अपना पहला एशियाई खेल स्वर्ण पदक जीता, बल्कि 75 किग्रा भार वर्ग में देश के लिए एक नया इतिहास भी रच दिया।
फाइनल मुकाबले में दिखी लवलीना की बेहतरीन रणनीतिक समझ
सेमीफाइनल और फाइनल, दोनों ही मुकाबलों में लवलीना ने शुरुआत में थोड़ा समय लिया और धीरे-धीरे अपनी लय हासिल की। सेमीफाइनल में उन्होंने मैच के अंतिम चरणों में आक्रामक रुख अपनाते हुए कजाकिस्तान की मुक्केबाज पर पूरी तरह दबाव बनाया और फाइनल का टिकट पक्का किया। हालांकि, स्वर्ण पदक का मुकाबला पूरी तरह अलग और चुनौतीपूर्ण रहा। आक्रामक शैली में खेल रहीं चीन की बाओ जियी के खिलाफ लवलीना ने क्लिंच का समझदारी से सहारा लिया, संयम बनाए रखा और सही मौके का इंतजार करते हुए रणनीतिक तरीके से जवाबी पंच जड़े। मुकाबले के अंत तक लवलीना ने सुरक्षित बढ़त बना ली थी और अंत में चीनी खिलाड़ी के हमलों से बचते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया। उनकी इसी रणनीतिक समझ और परिस्थितियों के अनुकूल खेलने की क्षमता ने उन्हें एशियन गेम्स 2026 का स्वर्ण पदक दिलाया।
जन्मदिन पर मिला जीवन का सबसे बड़ा तोहफा
लवलीना के लिए दो अक्टूबर की तारीख अब उनके खेल जीवन की सबसे ऐतिहासिक तारीख बन चुकी है। जिस दिन वह 29 वर्ष की हुईं, उसी दिन उन्होंने एशियाई खेलों का सबसे बड़ा मुकाम हासिल किया। असम की इस प्रतिभाशाली मुक्केबाज ने रिंग में उतरने से पहले ही एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली थी; वह लगातार दो एशियाई खेलों के खिताबी मुकाबले में पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला मुक्केबाज बन चुकी थीं। इससे पहले हांगझोउ एशियाई खेलों में उन्होंने रजत पदक जीता था, जबकि इस बार उन्होंने अपने पदक का रंग बदलकर स्वर्ण में तब्दील कर दिया।
75 किलो भार वर्ग में देश का पहला एशियाड गोल्ड
लवलीना का यह स्वर्ण पदक महिलाओं के 75 किग्रा भार वर्ग में भारत का पहला एशियाई खेल स्वर्ण है। इस भार वर्ग में भारतीय महिला मुक्केबाजों ने इससे पहले भी पदक जीते थे, लेकिन कभी सोने का तमगा हाथ नहीं लगा था। वर्ष 2010 ग्वांगझू एशियाई खेलों में कविता गोयत ने कांस्य पदक जीता था, जबकि 2014 इंचियोन में पूजा रानी ने भी कांस्य अपने नाम किया था। इसके बाद 2022 हांगझोउ में लवलीना ने रजत पदक जीता और अब 2026 आइची-नागोया में लवलीना ने इसी भार वर्ग में भारत को पहली बार चैंपियन बना दिया है।
| एशियन गेम्स | भारतीय पदक विजेता | पदक |
| 2010 ग्वांगझू | कविता गोयत | कांस्य |
| 2014 इंचियोन | पूजा रानी | कांस्य |
| 2022 हांगझोउ | लवलीना बोरगोहेन | रजत |
| 2026 आइची-नागोया | लवलीना बोरगोहेन | स्वर्ण |
महिला बॉक्सिंग में पूरे 12 साल बाद आया स्वर्ण पदक
लवलीना का यह स्वर्ण पदक भारतीय महिला बॉक्सिंग के इतिहास में बेहद खास और ऐतिहासिक है। एशियाई खेलों में भारत को महिला बॉक्सिंग का पहला स्वर्ण पदक महान मुक्केबाज मैरी कॉम ने 2014 इंचियोन खेलों में दिलाया था, जब उन्होंने 51 किग्रा वर्ग में बाजी मारी थी। इसके बाद भारत को महिला बॉक्सिंग में अगले एशियाड गोल्ड के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा, जिसे 2026 में लवलीना ने समाप्त किया। वह मैरी कॉम के बाद एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला मुक्केबाज बन चुकी हैं।
इसके अलावा, लवलीना के नाम एक और ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ गई है। वह अब एशियाई खेलों में स्वर्ण और रजत, दोनों पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला मुक्केबाज बन गई हैं। इससे पहले मैरी कॉम एशियाई खेलों की मुक्केबाजी में दो पदक जीतने वाली इकलौती भारतीय महिला थीं, जिन्होंने 2014 में स्वर्ण और 2010 में कांस्य पदक जीता था।
फाइनल मुकाबले में चीनी खिलाड़ी को 5-0 से दी मात
फाइनल मुकाबले में लवलीना के सामने चीन की मजबूत मुक्केबाज बाओ जियी थीं। बाओ एशियन एलीट चैंपियनशिप की स्वर्ण पदक विजेता रह चुकी हैं और इस मुकाबले से पहले उनका एमेच्योर करियर भी काफी शानदार रहा था। लेकिन खिताबी मुकाबले में लवलीना ने उन्हें अपनी रणनीति से पूरी तरह बेअसर कर दिया। भारतीय मुक्केबाज ने पूरे मैच के दौरान अपने अनुभव का शानदार इस्तेमाल किया। उन्होंने दूरी बनाए रखते हुए सही समय पर सटीक और करारे पंच लगाए। चीनी खिलाड़ी ने कई बार करीब आकर हमला करने की कोशिश की, लेकिन लवलीना ने अपनी डिफेंस और नियंत्रण को टूटने नहीं दिया। अंत में सभी पांचों जजों ने फैसला भारतीय मुक्केबाज के पक्ष में सुनाया और लवलीना ने 5-0 से मुकाबला जीत लिया।
सेमीफाइनल में भी दिखाया था गजब का जज्बा
फाइनल तक का लवलीना का सफर भी बिल्कुल आसान नहीं रहा था। सेमीफाइनल मुकाबले में उनका मुकाबला कजाकिस्तान की मजबूत मुक्केबाज नताल्या बोगदानोवा से हुआ था, जो 70 किग्रा वर्ग की विश्व चैंपियन रह चुकी हैं। लवलीना ने एक बेहद संघर्षपूर्ण और कड़े मुकाबले में उन्हें 3-2 के स्प्लिट डिसीजन से मात देकर फाइनल का सफर तय किया था। इस जीत के साथ ही वह लगातार दो एशियाई खेलों के फाइनल में पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला मुक्केबाज बन गई थीं।
लवलीना बोरगोहेन का संक्षिप्त परिचय
लवलीना बोरगोहेन असम के गोलाघाट जिले के बड़ामुखिया गाँव की रहने वाली एक विश्व प्रसिद्ध भारतीय मुक्केबाज हैं। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1997 को हुआ था। शुरुआत में उन्होंने अपनी जुड़वां बहनों को देखकर किकबॉक्सिंग अपनाई थी, लेकिन 2012 में स्कूल के दौरान भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के ट्रायल में उनकी प्रतिभा को पहचाना गया, जिसके बाद उन्होंने पूरी तरह से मुक्केबाजी का रुख कर लिया।
ओलंपिक पदक से लेकर विश्व चैंपियन बनने तक का सफर
लवलीना की पहचान सिर्फ एक एशियाई खेल चैंपियन तक सीमित नहीं है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय बॉक्सिंग को कई ऐतिहासिक गौरव दिलाए हैं:
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उन्होंने 2018 और 2019 की विश्व चैंपियनशिप में लगातार कांस्य पदक जीते।
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टोक्यो ओलंपिक 2020 में उन्होंने महिलाओं के 69 किग्रा भार वर्ग में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा। वह ओलंपिक पदक जीतने वाली देश की तीसरी मुक्केबाज और मैरी कॉम के बाद दूसरी महिला मुक्केबाज बनीं।
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इसके बाद उन्होंने अपने भार वर्ग को बढ़ाकर 75 किग्रा किया और 2023 की विश्व चैंपियनशिप में शानदार स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
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उसी वर्ष एशियाई खेलों में रजत और कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भी रजत पदक जीतकर उन्होंने अपनी धाक कायम रखी।
| प्रतियोगिता | वर्ष | पदक/नतीजा | भार वर्ग |
| ओलंपिक | 2020 | कांस्य | 69 किग्रा |
| विश्व चैंपियनशिप | 2018 | कांस्य | 69 किग्रा |
| विश्व चैंपियनशिप | 2019 | कांस्य | 69 किग्रा |
| एशियाई चैंपियनशिप | 2021 | कांस्य | वेल्टरवेट |
| एशियाई चैंपियनशिप | 2022 | स्वर्ण | 75 किग्रा |
| एशियाई खेल | 2022 | रजत | 75 किग्रा |
| विश्व चैंपियनशिप | 2023 | स्वर्ण | 75 किग्रा |
| कॉमनवेल्थ गेम्स | 2026 | रजत | 75 किग्रा |
| एशियाई खेल | 2026 | स्वर्ण | 75 किग्रा |
खेल में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए लवलीना को वर्ष 2020 में प्रतिष्ठित 'अर्जुन पुरस्कार' और 2021 में देश के सर्वोच्च खेल सम्मान 'मेजर ध्यानचंद खेल रत्न' से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा, राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2022 में उन्हें असम पुलिस में डीएसपी के पद पर नियुक्त किया गया था।
भारत के कुल पदकों की स्थिति
लवलीना के इस बहुमूल्य स्वर्ण पदक के साथ ही एशियन गेम्स में भारत के स्वर्ण पदकों की कुल संख्या 12 हो चुकी है। वर्तमान में भारत के खाते में कुल 70 पदक दर्ज हैं, जिनमें 12 स्वर्ण, 24 रजत और 34 कांस्य पदक शामिल हैं। इस शानदार प्रदर्शन के साथ पदक तालिका में भारत सातवें स्थान पर मजबूती से बना हुआ है।
| खेल | स्वर्ण | रजत | कांस्य | कुल |
| आर्चरी | 4 | 1 | 1 | 6 |
| एथलेटिक्स | 1 | 9 | 14 | 24 |
| बैडमिंटन | 0 | 0 | 1 | 1 |
| बॉक्सिंग | 1 | 0 | 3 | 4 |
| क्रिकेट | 1 | 0 | 0 | 1 |
| कबड्डी | 2 | 0 | 0 | 2 |
| कुराश | 0 | 0 | 1 | 1 |
| मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स | 0 | 0 | 1 | 1 |
| रोइंग | 0 | 0 | 1 | 1 |
| सेलिंग | 0 | 1 | 2 | 3 |
| शूटिंग | 3 | 8 | 4 | 15 |
| सॉफ्ट टेनिस | 0 | 0 | 1 | 1 |
| स्क्वैश | 0 | 2 | 3 | 5 |
| टेबल टेनिस | 0 | 0 | 1 | 1 |
| वेटलिफ्टिंग | 0 | 1 | 0 | 1 |
| कुश्ती | 0 | 1 | 1 | 2 |
| वुशु | 0 | 1 | 0 | 1 |
| कुल योग | 12 | 24 | 34 | 70 |

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