नई दिल्ली 19 सितंबर से जापान में शुरु होने जा रहे एशियाई खेलों में भारत को भी काफी पदकों की उम्मीद है। उसके कई खिलाड़ी स्वर्ण के भी दावेदार हैं। एशियाई खेलों में साल 2022 में भारत ने 28 स्वर्ण सहित कुल 106 पदक जीते। इस बार, भारतीय दल का लक्ष्य और बेहतर प्रदर्शन करना रहेगा। भारतीय दल पिछली उपलब्धियों को दोहराते हुए अपने स्वर्ण पदकों की संख्या को भी बढ़ाना चाहता है। भारतीय पुरुष और महिला क्रिकेट टीमें इस बार भी अपने खिताब बनाये रखन चाहेंगी। इसी प्रकार भारतीय कबड्डी टीम भी विजेत न होने के कारण् स्वर्ण पदक बरकरार रखने की पूरी उम्मीद करेंगी। इसे अलावा कई व्यक्तिगत एथलीट भी हैं जिनसे स्वर्ण पदक की उम्मीदें हैं।
कंपाउंड तीरंदाजी में भारत की सबसे मजबूत दावेदार ज्योति सुरेखा वेन्नम हैं, जिन्होंने 2022 हांगझोऊ गेम्स में तीन स्वर्ण पदक जीते थे। उनके साथ, धीरज बोम्मादेवरा ने तीरंदारी विश्व कप जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष बनकर इतिहास रचा है, और 2026 अंताल्या विश्वकप में भी स्वर्ण पदक जीता है। इससे वह पुरुष रिकर्व तीरंदाज के तौर पर एक प्रमुख दावेदार बन जाते हैं। वहीं बैडमिंटन में, पूर्व विश्व चैंपियन और दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु से काफी उम्मीदें हैं। उन्होंने अपने करियर में कई रिकॉर्ड बनाए हैं और कई पदक जीते हैं, और अब एशियन गेम्स 2026 का स्वर्ण पदक उनकी सूची में अगला लक्ष्य होगा। पुरुषों के एकल में लक्ष्य सेन भी स्वर्ण के मजबूत उम्मीद हैं। उन्होंने 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक पदक जीता था और उसी साल थॉमस कप जीतने में भी अहम भूमिका निभाई थी।
वहीं निशानेबाज में, मनु भाकर से भी स्वर्ण की उम्मीदें हैं। वह भारत की एक ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट हैं। उनके साथ, ईशा सिंह भी अच्छी फॉर्म में हैं। ईशा महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल में दुनिया की नंबर 1 और 10 मीटर एयर पिस्टल में नंबर 2 खिलाड़ी हैं। उन्होंने हांगझोऊ में दो व्यक्तिगत रजत पदक और एक टीम स्वर्ण पदक भी जीता था। वेटलिफ्टिंग में, मीराबाई चानू, 49 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण की पबल दावेदार हैं। कुश्ती में, सुजीत कलकल 65 किलोग्राम वर्ग, और अमन सेहरावत, 57 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक के दावेदार हैं।  एथलेटिक्स में, अविनाश साबले 3000 मीटर स्टीपलचेजर में पदक े प्रबल दावेदार हैं। इससे साफ है कि भारत को इन खेलों में कई पदक मिल सकते हैं।