वाशिंगटन। अमेरिका के टेनेसी राज्य में मौत की सजा पाने वाली महिला कैदी क्रिस्टा पाइक को सजा देने के दो असफल प्रयास किए गए। अधिकारियों द्वारा दो बार घातक इंजेक्शन दिए जाने के बावजूद कैदी की सांसें चलती रहीं, जिसके बाद उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस अनूठी और दुर्लभ घटना ने कानूनी और चिकित्सीय हलकों में बड़ी बहस छेड़ दी है।

दो बार घातक इंजेक्शन देने की कोशिश रही नाकाम

प्राप्त जानकारी के अनुसार, नैशविल के रिवरबेंड मैक्सिमम सिक्योरिटी इंस्टीट्यूशन में स्थानीय समयानुसार गुरुवार रात आठ बजे 50 वर्षीय क्रिस्टा पाइक को मौत की सजा देने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। टेनेसी के जेल प्रोटोकॉल के तहत दवाओं का दूसरा सेट भी तैयार रखा गया था, ताकि पहली खुराक विफल होने पर उसका इस्तेमाल किया जा सके। हालांकि, दोनों बार इंजेक्शन दिए जाने के बावजूद पाइक की मौत नहीं हुई। उसकी कानूनी टीम ने बताया कि इंजेक्शन के बाद वह अचेत तो हो गई, लेकिन उसकी धड़कनें चलती रहीं और उसे अस्पताल ले जाकर जीवन रक्षक चिकित्सा दी जा रही है।

सजा पर अमल के लिए चली लंबी कानूनी लड़ाई

इस हाई-प्रोफाइल मामले में सजा पर अमल करने को लेकर अंतिम समय तक अदालत में जोरदार कानूनी जद्दोजहद चली। अंततः अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जानलेवा इंजेक्शन के जरिए सजा देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी थी, जिसके बाद जेल प्रशासन ने यह कदम उठाया। रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य के मौजूदा मृत्युदंड प्रोटोकॉल में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यदि निर्धारित दोनों खुराकें देने के बाद भी कैदी जीवित रहता है, तो ऐसी स्थिति में आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

क्या है क्रिस्टा पाइक के अपराध का इतिहास?

क्रिस्टा पाइक को वर्ष 1996 में 19 वर्षीय युवक कोलीन स्लेमर की निर्मम हत्या के जुर्म में मौत की सजा सुनाई गई थी। वारदात के समय पाइक की उम्र महज 18 वर्ष थी। उसने और उसके तत्कालीन सहयात्री टेडरिल शिप ने मिलकर इस सनसनीखेज हत्याकांड को अंजाम दिया था। ये दोनों एक ऐसे जॉब ट्रेनिंग कैंप में मिले थे जो किशोरों की सहायता के लिए आयोजित किया गया था। अब इस असफल निष्पादन के बाद कानूनी जानकारों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अदालत और जेल प्रशासन आगे क्या रुख अपनाता है।