एशियाई खेलों की वुशु प्रतियोगिता में भारत की स्टार एथलीट रोशिबिना देवी ने एक बार फिर पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया है। अंतिम क्षणों में टीम में शामिल हुईं रोशिबिना ने अपनी श्रेणी में शानदार प्रदर्शन करते हुए पदक अपने नाम किया, यद्यपि उनके मन में लगातार दूसरी बार स्वर्ण पदक से चूक जाने का मलाल बना हुआ है। स्वर्ण पदक अर्जित करने के अपने संकल्प के लिए रोशिबिना ने अपने प्रिय केश (बाल) तक कटवा दिए थे।

उल्लेखनीय है कि तीन वर्ष पूर्व विश्व चैंपियनशिप के दौरान बाउट के मध्य बाल चेहरे पर आ जाने से खेल बाधित हुआ था, जिसके चलते उन्हें एक अंक का दंड (पेनाल्टी) मिला था और वे स्वर्ण पदक से वंचित रह गई थीं। रोशिबिना ने बताया कि खेल में किसी भी प्रकार की बाधा से बचने के लिए उन्होंने बाल कटवाने का कठिन निर्णय लिया और संकल्प लिया है कि अब वे विश्व चैंपियनशिप अथवा एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के उपरांत ही अपने केश बढ़ाएंगी।

विवादों के मध्य मानसिक दबाव और सोशल मीडिया से दूरी

टीम चयन को लेकर उत्पन्न विवाद एवं मीडिया कवरेज के उपरांत रोशिबिना को भारी मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा था। उन्होंने बताया कि इस दौरान वे एशियाई खेलों हेतु अपेक्षित एकाग्रता के साथ अभ्यास नहीं कर सकी थीं। नकारात्मक टिप्पणियों और मानसिक विकर्षण से स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए उन्होंने अपने सभी सोशल मीडिया खातों को निष्क्रिय (डीएक्टिवेट) कर दिया था।

उन्होंने साझा किया कि प्रतिकूल परिस्थितियों में मनोबल बनाए रखने के लिए उन्होंने मणिपुर की विषम परिस्थितियों और वहां के लोगों के संघर्ष को याद किया, जिससे उन्हें अपने व्यक्तिगत दुखों से उबरने की प्रेरणा मिली।

गंभीर चोटों के कारण दो वर्षों का संघर्ष

विगत एशियाई खेलों में रजत पदक अर्जित करने के पश्चात रोशिबिना का खेल सफर अत्यंत चुनौतियों से भरा रहा। विश्व चैंपियनशिप के उपरांत उनके घुटने में गंभीर चोट आई, जिसके लिए शल्य चिकित्सा (ऑपरेशन) करानी पड़ी। पुनर्वास के पश्चात वापसी करते ही वे पुनः घुटने की चोट से ग्रस्त हो गईं, जिसके कारण उन्हें लगभग दो वर्षों तक प्रतिस्पर्धात्मक खेल से दूर रहना पड़ा।

वर्ष 2026 के प्रारंभ में पूर्णतः स्वस्थ होकर मैदान पर लौटने के उपरांत श्रीनगर में आयोजित अंतिम चयन ट्रायल में उन्हें कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ा था।